वे मुस्काते फूल, नहीं – महादेवी वर्मा


वे मुस्काते फूल, नहीं

जिनको आता है मुर्झाना,

वे तारों के दीप, नहीं

जिनको भाता है बुझ जाना

 

वे सूने से नयन,नहीं

जिनमें बनते आंसू मोती,

वह प्राणों की सेज,नही

जिसमें बेसुध पीड़ा सोती

 

वे नीलम के मेघ, नहीं

जिनको है घुल जाने की चाह

वह अनन्त रितुराज,नहीं

जिसने देखी जाने की राह


ऎसा तेरा लोक, वेदना

नहीं,नहीं जिसमें अवसाद,

जलना जाना नहीं, नहीं

जिसने जाना मिटने का स्वाद!


क्या अमरों का लोक मिलेगा

तेरी करुणा का उपहार

रहने दो हे देव! अरे

यह मेरा मिटने का अधिकार!

(the english translation of the poem done by me is given below. it’s link- https://iwithmyself.wordpress.com/2007/12/23/those-smiling-flowers-which-do-not/

Advertisements

One thought on “वे मुस्काते फूल, नहीं – महादेवी वर्मा

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s